किसानों के लिए मुनाफे का सौदा है पालक की खेती, होगी तगड़ी कमाई, साल भर बनी रहती है मांग। पालक की खेती करना किसानों के लिए एक मुनाफे का सौदा हो सकता है, क्योंकि इसकी मांग साल भर रहती है और यह कम समय में तैयार हो जाती है। पालक की खेती की पूरी जानकारी नीचे दी गई है:
जलवायु और मिट्टी
- जलवायु: पालक ठंडी और हल्की नम जलवायु में सबसे अच्छी होती है। इसके लिए 15°C से 25°C का तापमान सबसे बेहतर माना जाता है। ज़्यादा गर्मी या ज़्यादा ठंड से इसकी गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ सकता है।
- मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट मिट्टी पालक की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
खेत की तैयारी और बुवाई
- खेत की तैयारी: सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा कर लें। इसके बाद, खेत को समतल करें ताकि पानी का वितरण सही से हो सके। खरपतवार (weed) हटाने के लिए 2-3 बार जुताई करना ज़रूरी है।
- बुवाई का समय: वैसे तो पालक की खेती साल भर की जा सकती है, लेकिन सितंबर से अक्टूबर का महीना रबी (सर्दियों) की फसल के लिए और फरवरी से मार्च का महीना गर्मियों की फसल के लिए सबसे अच्छा होता है।
- बीज दर: प्रति एकड़ 4 से 6 किलो बीज की ज़रूरत होती है। बीज को बोने से पहले 12-24 घंटे तक पानी में भिगोने से अंकुरण जल्दी होता है।
- बुवाई का तरीका: पालक के बीज को कतारों (rows) में बोना सबसे बेहतर माना जाता है। कतार से कतार की दूरी 20-30 सेंटीमीटर और पौधों के बीच की दूरी 5-10 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
उन्नत किस्में
भारत में पालक की कुछ उन्नत और अच्छी पैदावार देने वाली किस्में हैं:
- पूसा हरित
- ऑल ग्रीन
- पूसा ज्योति
- पंजाब ग्रीन
- जोबनेर ग्रीन
- एनएस-1479 (NS-1479)
खाद और उर्वरक प्रबंधन
अच्छी पैदावार के लिए, मिट्टी की तैयारी के समय प्रति एकड़ 15-20 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाना फायदेमंद होता है।
रासायनिक उर्वरकों के लिए, प्रति एकड़ की दर से नाइट्रोजन 40-50 किग्रा, फास्फोरस 20-25 किग्रा, और पोटाश 20 किग्रा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय खेत में डाल दें।
- नाइट्रोजन की बाकी बची हुई आधी मात्रा को दो बराबर हिस्सों में बांटकर, पहली कटाई के बाद और दूसरी कटाई के बाद डालें।
सिंचाई और कटाई
- सिंचाई: बीज अंकुरण के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें। उसके बाद, मिट्टी और मौसम के हिसाब से हर 7 से 15 दिनों के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें। गर्मियों में बार-बार और सर्दियों में कम सिंचाई की ज़रूरत होती है।
- कटाई: पालक की पहली कटाई बुवाई के 25 से 30 दिन बाद की जा सकती है। इसके बाद, हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर 4-5 बार कटाई की जा सकती है। पत्तियों को कोमल और ताज़ी अवस्था में ही काटना चाहिए।
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