Farming: आलू की खेती से किसान कमा सकते अच्छा मुनाफा, यहाँ देखे खेती से जुड़ी पूरी जानकारी

Farming: आलू की खेती से किसान कमा सकते अच्छा मुनाफा, यहाँ देखे खेती से जुड़ी पूरी जानकारी। आलू भारत की एक महत्वपूर्ण फसल है और इसकी खेती से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। आलू की खेती से जुड़ी पूरी जानकारी यहाँ दी गई है:

1. मिट्टी और जलवायु

  • मिट्टी: आलू की खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसमें जल निकासी की व्यवस्था अच्छी हो। मिट्टी का pH मान 5.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए।
  • जलवायु: आलू ठंडे मौसम की फसल है। कंद (आलू) बनने के समय तापमान 17 से 19°C होना सबसे बेहतर होता है। आलू की फसल पाले के प्रति संवेदनशील होती है।

2. खेत की तैयारी

  • आलू की बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करना बहुत जरूरी है। मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 2-3 गहरी जुताई करें।
  • खेत को समतल करें और फिर क्यारियां या मेड़ें बनाएं।

3. बुवाई का समय और तरीका

  • समय: भारत में आलू की बुवाई का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से नवंबर के बीच होता है। कुछ क्षेत्रों में अगेती और पछेती खेती भी की जाती है।
  • बीज: बुवाई के लिए स्वस्थ और प्रमाणित बीजों का चुनाव करें। बीजों को मिट्टी जनित बीमारियों से बचाने के लिए बुवाई से पहले उपचारित करना चाहिए।
  • तरीका:
    • मेड़ बनाकर बुवाई: मेड़ें बनाकर आलू के बीज को उचित दूरी और गहराई पर लगाया जाता है। यह तरीका अधिक नमी वाली जमीन के लिए उपयुक्त है।
    • समतल भूमि पर बुवाई: इस विधि में 60 सेंटीमीटर की दूरी पर लाइन बनाकर 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी पर आलू के बीज को बोया जाता है और फिर ऊपर से मिट्टी चढ़ा दी जाती है।

4. खाद और उर्वरक

आलू की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की जाँच के आधार पर खाद और उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। सामान्य तौर पर प्रति हेक्टेयर के लिए:

  • गोबर की खाद: 15-20 टन
  • नाइट्रोजन: 120-150 किलोग्राम
  • फास्फोरस: 80 किलोग्राम
  • पोटाश: 80-100 किलोग्राम

नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय खेत में डाल देनी चाहिए। बाकी बची हुई नाइट्रोजन की मात्रा 30-35 दिन बाद डालें।

5. सिंचाई

  • आलू की फसल को नमी की ज़रूरत होती है। मिट्टी की नमी के अनुसार सिंचाई करें।
  • पहली सिंचाई बुवाई के 30-35 दिन बाद करनी चाहिए।
  • कटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें ताकि आलू सख्त हो जाएं।

6. उन्नत किस्में

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित आलू की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं:

  • कुफरी पुखराज: यह एक अगेती किस्म है जो 70-90 दिन में पक कर तैयार हो जाती है।
  • कुफरी चंद्रमुखी: 110-130 दिनों में तैयार होने वाली किस्म।
  • कुफरी सिंदूरी: यह पाले को सहन करने वाली किस्म है, जो 120-125 दिनों में तैयार होती है।
  • कुफरी ज्योति: यह पिछेता झुलसा रोग प्रतिरोधी है।
  • कुफरी चिप्सोना: चिप्स बनाने के लिए उपयुक्त।

7. खुदाई और भंडारण

  • फसल की पत्तियाँ पीली पड़कर सूखने लगें, तो समझ लें कि आलू खुदाई के लिए तैयार है।
  • कटाई के बाद आलू को छांव में 2-3 दिन तक सुखाएं ताकि उसकी ऊपरी परत मजबूत हो जाए।
  • आलू को ठंडी और हवादार जगह पर स्टोर करें।

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