Bamboo: सिर्फ एक बार लगाएं बांस की खेती में पैसा, पूरी जिंदगी होगी अंधाधुंध कमाई, जाने कैसे करे इसकी खेती। भारत में बांस को ‘गरीब आदमी की लकड़ी’ के रूप में जाना जाता है, लेकिन अब यह किसानों के लिए आय का एक नया और टिकाऊ स्रोत बन रहा है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) जैसी योजनाओं ने बांस की खेती को बढ़ावा दिया है, जिससे किसान पारंपरिक फसलों की तुलना में ज़्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। बांस की खेती एक बार की मेहनत है जो कई सालों तक लगातार कमाई देती है।
बांस की खेती के फायदे
बांस की खेती के कई फायदे हैं, जो इसे किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाते हैं:
- तेजी से विकास: बांस दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले पौधों में से एक है। इसकी कुछ प्रजातियाँ एक दिन में 3 फीट तक बढ़ सकती हैं।
- कम लागत, ज़्यादा मुनाफा: एक बार पौधा लगाने के बाद, आपको सालों तक इसमें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। इसकी खेती में पानी और खाद की भी कम ज़रूरत होती है। एक एकड़ में बांस की खेती से आप सालाना 3 से 4 लाख रुपये तक कमा सकते हैं।
- पर्यावरण के अनुकूल: बांस कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है और ऑक्सीजन छोड़ता है। यह मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मदद करता है।
- बहुपयोगी पौधा: बांस का इस्तेमाल फर्नीचर, घर बनाने, हस्तशिल्प, कागज, कपड़े, और यहाँ तक कि खाने-पीने की चीज़ों में भी होता है। इसकी पत्तियों को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
खेती की शुरुआत कैसे करें?
बांस की खेती शुरू करना मुश्किल नहीं है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:
1. सही प्रजाति का चुनाव: भारत में बांस की 136 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। आपको अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार सही प्रजाति का चुनाव करना चाहिए। कुछ लोकप्रिय प्रजातियाँ हैं:
- बांबूसा टुल्डा (Bambusa Tulda): यह फर्नीचर और निर्माण कार्यों के लिए बहुत अच्छी है।
- डेंड्रोकैलामस स्ट्रिक्टस (Dendrocalamus Strictus): इसे ‘नर बांस’ भी कहते हैं और यह काफी मजबूत होता है।
- बांबूसा बम्बोज़ (Bambusa Bambos): यह खाने योग्य अंकुर (shoots) के लिए लोकप्रिय है।
2. ज़मीन की तैयारी और रोपण:
- ज़मीन: बांस किसी भी तरह की मिट्टी में उग सकता है, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है।
- रोपण: आप नर्सरी से पौधे खरीद सकते हैं। पौधों को लगाने से पहले 3x3x3 फीट के गड्ढे खोद लें और उनमें गोबर की खाद मिला दें। एक एकड़ में करीब 200 से 250 पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे उन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
3. देखभाल और कटाई:
- देखभाल: शुरुआती 2-3 सालों तक पौधों की नियमित देखभाल ज़रूरी है। उन्हें खरपतवार से बचाना और ज़रूरत पड़ने पर सिंचाई करना महत्वपूर्ण है।
- कटाई: बांस के पौधे रोपण के बाद 3 से 4 साल में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके बाद आप हर साल इसकी कटाई कर सकते हैं। कटाई का सही समय अक्टूबर से नवंबर या मार्च से अप्रैल के बीच होता है।
सरकारी सहायता और योजनाएं
भारत सरकार ने बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें से राष्ट्रीय बांस मिशन प्रमुख है। इस मिशन के तहत, सरकार किसानों को बांस की खेती के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसमें पौधे खरीदने से लेकर खेत की तैयारी तक का खर्च शामिल होता है। इसके अलावा, कई राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर किसानों को सब्सिडी और तकनीकी सहायता देती हैं।
बांस की खेती केवल एक कृषि गतिविधि नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण की रक्षा करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक शक्तिशाली साधन है। सही जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान इस क्षेत्र में एक सफल करियर बना सकते हैं।