Maharashtra: फडणवीस की वजह से साथ आए राज और Uddhav Thackeray, राजनीति में नई हलचल

Maharashtra: महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब दो चचेरे भाई राज ठाकरे और Uddhav Thackeray एक साथ मंच साझा करते नजर आए। यह पहली बार है जब दोनों ने सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाई और भाजपा तथा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखे हमले बोले। इस जनसभा के दौरान दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी, जिसमें भाषा विवाद, मराठी अस्मिता, हिंदुत्व और सत्ता की राजनीति प्रमुख रहे।

यह भी पढ़े- Ladli Behna Yojana 26th Installment Date: लाडली बहना योजना की 26वीं किस्त इस दिन आएगी

देवेंद्र फडणवीस ने दोनों को एक मंच पर खड़ा कर दिया

राज ठाकरे ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि, “जो काम बालासाहेब ठाकरे भी नहीं कर पाए, वह आज देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया। उन्होंने हमें दोनों भाइयों को एक साथ मंच पर खड़ा कर दिया।” इस वक्तव्य ने सभा में बैठे लोगों को चौंका दिया, लेकिन इसके बाद Uddhav Thackeray ने भी इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा, “हमारे एक साथ होने से ज़्यादा जरूरी ये है कि हम क्या कह रहे हैं। हम साथ आए हैं और साथ रहेंगे। अब जो हमें इस्तेमाल करके फेंकते हैं, उन्हें बाहर निकालेंगे।”

एकनाथ शिंदे पर Uddhav Thackeray का तीखा हमला

सभा के दौरान Uddhav Thackeray ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “तुमने हमें बहुत इस्तेमाल किया। अगर बालासाहेब ठाकरे का साथ न होता, तो महाराष्ट्र में तुम्हें कोई नहीं जानता। हिंदुत्व का पाठ हमें मत पढ़ाओ।” उन्होंने आगे कहा, “जब मुंबई में दंगे हो रहे थे, तब मराठा समाज ने हर हिंदू की रक्षा की थी, चाहे वो किसी भी धर्म या जाति का हो। अगर न्याय के लिए लड़ रहे मराठी युवाओं को तुम गुंडा कह रहे हो, तो हां, हम गुंडे हैं।”

राज ठाकरे ने हिंदी थोपने के फैसले पर जताई नाराजगी

राज ठाकरे ने अपने भाषण में भाषा के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा, “हमें हिंदी भाषा से कोई नफरत नहीं है। हमें हिंदी पसंद है, सभी भाषाएं अच्छी होती हैं। लेकिन जबरदस्ती कोई भाषा थोपना हमें मंजूर नहीं है।”

Uddhav Thackeray ने भी इस बात का समर्थन किया और कहा कि भाषा संस्कृति की आत्मा होती है और महाराष्ट्र की आत्मा मराठी है। राज ठाकरे ने आगे कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने तीन भाषा फॉर्मूला लागू करने का जो निर्णय लिया था, वह मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश का हिस्सा था। लेकिन मराठी जनता की एकता के कारण यह फैसला वापस लेना पड़ा।

मराठी अस्मिता पर कोई समझौता नहीं

राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि भाषा का किसी व्यक्ति की क्षमता से कोई लेना-देना नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे और मेरे पिता श्रीकांत ठाकरे ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की थी। बालासाहेब अंग्रेजी अखबार में काम करते थे, लेकिन उन्होंने कभी मराठी पर समझौता नहीं किया।

उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कई नेता और फिल्म स्टार अंग्रेजी स्कूलों से पढ़े हैं, लेकिन वे तमिल और तेलुगु भाषा पर गर्व करते हैं। उन्होंने LK अडवाणी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने मिशनरी स्कूल से पढ़ाई की, फिर भी कोई उनके हिंदुत्व पर शक नहीं कर सकता।

हिंदी भाषी राज्यों की हालत पर सवाल

Uddhav Thackeray और राज ठाकरे दोनों ने हिंदी भाषी राज्यों की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। राज ठाकरे ने कहा, “हिंदी भाषी राज्य आज भी आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। वहां के लोग रोजगार के लिए गैर-हिंदी भाषी राज्यों में पलायन कर रहे हैं। अगर हिंदी से प्रगति होती, तो ये राज्य सबसे आगे होते।”

उन्होंने कहा कि ये लोग सिर्फ वोटों के लिए भाषा और जाति की राजनीति कर रहे हैं। राज ठाकरे ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हिंदी को थोपने के फैसले को शांतिपूर्वक स्वीकार कर लिया जाता, तो अगला कदम मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना होता।

यह भी पढ़े- Driving Licence Online Apply: अब घर बैठे बनवाएं ड्राइविंग लाइसेंस, जानिए आवेदन प्रक्रिया, फीस और नियम

“हम कोई Marathi नहीं होने देंगे अलग”

राज ठाकरे ने आगे कहा, “इनकी मंशा है कि मराठी लोगों को आपस में बांट दिया जाए। पहले भाषा का मुद्दा लाया गया और अब जातिगत राजनीति की जा रही है। लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे।”

उन्होंने कहा कि मराठों का राज हिंदी भाषी राज्यों पर लंबे समय तक रहा है, लेकिन हमने कभी वहां मराठी थोपने की कोशिश नहीं की। आज ये लोग हिंदी के नाम पर हमारी संस्कृति पर हमला कर रहे हैं।

“मंत्री खुद ठीक से हिंदी नहीं बोलते”

सभा के अंत में राज ठाकरे ने चुटकी लेते हुए कहा, “अगर आप इन मंत्रियों की हिंदी सुनेंगे, तो आप खुद गिर जाएंगे। ये लोग हिंदी के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, लेकिन खुद भाषा की गरिमा को नहीं समझते।”

Uddhav Thackeray ने भी इन बातों का समर्थन करते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि महाराष्ट्र के लोग एकजुट हों और अपनी भाषा, संस्कृति और अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।

निष्कर्ष Uddhav Thackeray

आज की सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आने वाला है। Uddhav Thackeray और राज ठाकरे की यह एकता न केवल एक राजनीतिक संकेत है, बल्कि मराठी अस्मिता, भाषा की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय गौरव के लिए एक मजबूत संदेश भी है। दोनों नेताओं ने साफ किया कि वे अब साथ आए हैं और जो भी महाराष्ट्र के हितों से खिलवाड़ करेगा, उसे करारा जवाब दिया जाएगा।

Leave a Comment