Tata Sumo: भारतीय सड़कों का बेताज बादशाह टाटा सूमो दमदार लुक, लक्जरी इंटीरियर और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने वालो के लिए। भारतीय सड़कों पर एक ऐसा नाम जिसने दशकों तक राज किया, वह है टाटा सूमो। 1994 में लॉन्च हुई यह एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) न केवल एक कार थी, बल्कि यह भारतीय परिवारों, टैक्सी ऑपरेटरों और ग्रामीण इलाकों के लिए भरोसे, मजबूती और आराम का पर्याय बन गई थी। अपने दमदार लुक, विशाल इंटीरियर और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने की क्षमता के कारण सूमो ने जल्द ही देश के दिल में अपनी जगह बना ली। यह आर्टिकल टाटा सूमो के शानदार सफ़र, उसकी विशेषताओं और भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास में उसके महत्व पर प्रकाश डालता है।
एक पहचान जिसने बदल दी गेम
जब टाटा मोटर्स ने सूमो को बाज़ार में उतारा, तब भारतीय ऑटोमोबाइल बाज़ार में इतनी बड़ी, मज़बूत और किफ़ायती गाड़ी का अभाव था। सूमो ने इस खालीपन को भरा और एक नए सेगमेंट की शुरुआत की। इसका बॉक्सी डिज़ाइन, ऊँचा ग्राउंड क्लीयरेंस और मज़बूत चेसिस इसे हर तरह के रास्तों के लिए उपयुक्त बनाता था। इसकी विश्वसनीयता इतनी थी कि यह भारतीय सेना और पुलिस बलों की भी पसंद बन गई। ‘सूमो’ नाम टाटा मोटर्स के पूर्व एमडी सुमंत मूलगाँवकर के नाम पर रखा गया था, जो इस गाड़ी की अहमियत को और भी बढ़ा देता है।
टाटा सूमो इंजन और परफ़ॉर्मेंस
टाटा सूमो में शुरुआत में 2.0-लीटर डीज़ल इंजन दिया गया था, जो अपनी दमदार टॉर्क और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता था। यह इंजन कठिन से कठिन रास्तों पर भी सूमो को आसानी से खींच लेता था। बाद में, कंपनी ने समय-समय पर इसके इंजन को अपडेट किया और इसमें सूमो विक्टा और सूमो गोल्ड जैसे मॉडल्स में बेहतर और अधिक कुशल इंजन पेश किए। सूमो गोल्ड में इस्तेमाल किया गया सीआर4 (कॉमन रेल) डीज़ल इंजन बेहतर माइलेज और कम उत्सर्जन के साथ आया था, जिसने इसे आधुनिक मानकों के क़रीब ला दिया था।
टाटा सूमो इंटीरियर और आराम
भले ही सूमो का इंटीरियर आज की आधुनिक गाड़ियों जैसा लक्ज़री नहीं था, लेकिन यह बहुत ही व्यावहारिक और आरामदायक था। इसमें 7 से 9 लोगों के बैठने की क्षमता थी, जो इसे बड़े परिवारों और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एक आदर्श विकल्प बनाती थी। तीसरी पंक्ति की सीटें भी अच्छी जगह देती थीं, जो उस समय की बहुत कम गाड़ियों में मिलती थी। सूमो का विशाल केबिन और ऊँची छत यात्रियों को लम्बी यात्राओं में भी थकावट महसूस नहीं होने देती थी। इसके मज़बूत डैशबोर्ड और सरल कंट्रोल ने इसे चलाना और रखरखाव करना आसान बना दिया था।
भारतीय सड़कों का बेताज बादशाह
टाटा सूमो का सबसे बड़ा योगदान भारतीय टैक्सी और टूरिज्म इंडस्ट्री में रहा है। पहाड़ों से लेकर रेगिस्तानों तक, सूमो ने अपनी मज़बूती और विश्वसनीयता का लोहा मनवाया। यह एक ऐसी गाड़ी थी जिस पर लोग आँख बंद करके भरोसा कर सकते थे। इसके कम रखरखाव और किफ़ायती पार्ट्स ने इसे कमर्शियल यूज़र्स के बीच बहुत लोकप्रिय बना दिया। आज भी, देश के कई हिस्सों में आपको पुरानी सूमो गाड़ियाँ सड़कों पर चलती हुई दिख जाएंगी, जो इसकी टिकाऊपन का जीता-जागता सबूत है।
एक सम्मानजनक अंत और विरासत
आधुनिक सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों के कारण 2019 में टाटा मोटर्स ने सूमो का उत्पादन बंद कर दिया। यह एक युग का अंत था, जिसने भारतीय सड़कों पर तीन दशकों से अधिक समय तक अपनी पहचान बनाई थी। हालाँकि, सूमो की विरासत आज भी ज़िंदा है। इसकी विश्वसनीयता, मज़बूती और भारतीय उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को समझने की क्षमता ने टाटा मोटर्स को भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में एक बड़ी कंपनी बनने में मदद की। सूमो ने टाटा के लिए एक मज़बूत नींव रखी, जिस पर आज की नई गाड़ियाँ खड़ी हैं।
आज, जब हम सूमो को याद करते हैं, तो हमें सिर्फ़ एक गाड़ी नहीं, बल्कि एक ऐसे आइकॉन की याद आती है जिसने अनगिनत परिवारों को उनकी मंज़िल तक पहुँचाया और भारतीय ऑटोमोबाइल बाज़ार को एक नई दिशा दी। यह एक ऐसी गाड़ी थी जो अपनी सादगी में भी महान थी और जिसने भारतीय सड़कों पर एक अमिट छाप छोड़ी।
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